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जनगणना में OBC डेटा और डिजिटल पारदर्शिता को लेकर सवाल, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन

नवसेतु न्यूज, बलांगीर

बलांगीर, 22 जून – आगामी 2027 राष्ट्रीय जनगणना के पहले चरण ‘हाउस लिस्टिंग’ में OBC के लिए अलग विकल्प न दिए जाने और डिजिटल प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, बलांगीर ने आज जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के बलांगीर जिलाध्यक्ष सरोज कुमार मेश्वा के नेतृत्व में मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त जिलाधिकारी बलांगीर के माध्यम से जिला कलेक्टर कार्यालय, बलांगीर में सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है कि हाउस लिस्टिंग के दौरान परिवार की सामाजिक श्रेणी पूछे जाने पर केवल तीन विकल्प – अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य – दिए गए हैं। इसमें OBC के लिए कोई विकल्प नहीं रखा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि 2027 की राष्ट्रीय जनगणना में भी OBC की जातिगत गणना नहीं की जा रही है, जो OBC समाज के साथ अन्याय है। मोर्चा ने मांग की है कि फॉर्म में OBC के लिए अलग विकल्प जोड़ा जाए ताकि OBC के आंकड़े अलग से सूचीबद्ध हो सकें और उनके साथ न्याय हो सके।

दूसरा प्रमुख मुद्दा डिजिटल जनगणना की विश्वसनीयता का है। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल पद्धति से HLO नामक मोबाइल ऐप के जरिए की जा रही है। मोर्चा का आरोप है कि ऐप के जरिए एकत्र की गई जानकारी का कोई भौतिक रिकॉर्ड नहीं रहेगा और मांगे जाने पर भी वह उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। यदि डेटा गलत हुआ तो उसकी कोई जिम्मेदारी तय नहीं होगी और न ही कोई डिक्लेरेशन लिया जाएगा। ऐसे में डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। मोर्चा ने मांग की है कि जनगणना के आंकड़ों के भौतिक सत्यापन के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो ‘भारत बंद’ का आह्वान किया जाएगा। मोर्चा ने बताया कि ‘राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मार्च’ के तहत देश के 31 राज्यों के 625 जिलों में यह ज्ञापन सौंपा जा रहा है।

जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के सामाजिक चित्र को प्रतिबिंबित करती है। ऐसे में सभी वर्गों का सही डेटा संग्रह जरूरी है। OBC डेटा संग्रह पर स्पष्टता और डिजिटल डेटा के भौतिक सत्यापन के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाना समय की मांग है, ताकि जनगणना पर लोगों का भरोसा बढ़े और नीति निर्माण अधिक तर्कसंगत हो सके।

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